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शातिर ठग: नौकरी के बदले रेप करने वाला पांच नाम वाला ठग योगी का कर्मचारी

यूपी की राजधानी लखनऊ का अति विशिष्ट बंगला। सुरक्षा घेरा ऐसा कि परिन्दा भी पर न मार सके। इसके बावजूद ठगी के माहिर खिलाड़ी ने सेंध लगा डाली। इसी बंगले में तैनाती दिखाकर उदित कुमार अवस्थी नाम का ये ठग पिछले कई वर्षों से बेरोजगारों को ठगता आ रहा है। अपने शिकार से पहली मुलाकात वह इसी बंगले में करता है। मुख्यमंत्री के लिए आवंटित होने वाले इस सरकारी आवास पर दर्जनों की संख्या में अधिकारियों और कर्मचारियों की फौज तैनात रहती है। इसके बावजूद ये ठग अपने शिकार का आसानी से शिकार कर लेता है।

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पूरी स्टोरी पढ़ने के लिए आप दृष्टान्त मैगजीन के ऑनलाइन एडिशन को पढ़ सकते हैं….

वक्फ बोर्ड का शातिर खिलाड़ी ‘वसीम रिज़वी’ राकेश श्रीवास्तव की रिपोर्ट

 

पूरे उत्तर प्रदेश की क्या कहें, राजधानी लखनऊ में ही भ्रष्टाचारमुक्त प्रशासन का दावा दांव पर लगा हुआ है। हैरत कर देने वाली खबर ये है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सरकारी आवास (5, कालीदास मार्ग) पर मौजूद कार्यालय से ठगी का धंधा संचालित किए जाने की जानकारी ‘दृष्टान्त’ को मिली है। ठगी का शिकार बने व्यक्तियों की वीडियो रिकाॅर्डिंग, शिकायती पत्र, दस्तावेज, और स्टिंग आॅपरेशन के दौरान जुटाए गए सुबूत इस बात की तस्दीक कर रहे हैं कि मुख्यमंत्री की नाक के नीचे ही ठगों ने अपना जाल बिछा रखा है और मुख्यमंत्री को भनक तक नहीं।

लगभग आधा दर्जन छद्यम् नामों (उदित कुमार अवस्थी, मुदित शुक्ला, निरंजन चैहान,मुदित मोहन चैरसिया, छोटे लाल चैरसिया, उदित कुमार श्रीवास्तव) से अपना परिचय देने वाला यह कथित ठग स्वयं को मुख्यमंत्री आवास पर स्थित सचिव कार्यालय में तैनात बताता है। इसका कहना है कि वह 5, कालीदास मार्ग वाले बंगले में अफसर के रूप में तैनात है। इस बात को प्रमाणित करने के लिए वह अपने शिकार को पहली बार इसी बंगले पर मिलने के लिए बुलाता है। कार्यालय में मौजूद दूसरे अधिकारियों और कर्मचारियों से वह जिस प्रकार से बात करता है, प्रथम दृष्टया ऐसा ही प्रतीत होता है कि वह इसी कार्यालय में किसी अफसर के पद पर है। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों से लेकर अन्य कर्मचारियों जिस प्रकार से इस व्यक्ति के साथ व्यवहार करते हैं उसे देखकर कोई भी कह सकता है कि वह इसी कार्यालय में कार्यरत होगा। हालांकि इस सब के बावजूद दावे के साथ ये नहीं कहा जा सकता कि वह इस कार्यालय में किसी पद पर तैनात है भी अथवा नहीं लेकिन जिस प्रकार से वह वह ठगी का गिरोह चलाने के लिए इस कार्यालय का नाजायज इस्तेमाल कर रहा है उसे देखकर तो यही प्रतीत होता है कि उसके इस खेल में मुख्यमंत्री आवास के कई और कर्मचारी-अफसर मिले होंगे।

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